एमपी सरकार नहीं देती गन्ने पर प्रोत्साहन राशि, आंदोलित हो रहे किसान

किसानों ने बैठक कर लिया निर्णय, 23 को मुख्यमंत्री के नाम सौपेंगे ज्ञापन

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    प्रदेश और जिले में बड़ी संख्या में गन्ना उत्पादन करने वाले किसान सरकार की बेरुखी के चलते तगड़ा आर्थिक नुकसान उठाने को मजबूर हो रहे हैं। अन्य प्रदेशों में तो केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य के अलावा प्रदेश सरकारें भी अपनी ओर से प्रोत्साहन या बोनस राशि देती है, लेकिन प्रदेश में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। इससे जिले के किसान आंदोलित हो रहे हैं और जल्द ही अपनी मांग को लेकर सड़क पर उतर सकते हैं। गुरुवार को बैतूल बाजार क्षेत्र के किसानों ने एक बैठक कर आगामी 23 नवंबर को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन कलेक्टर को सौंपने का निर्णय लिया है।
    इस मुद्दे को लेकर कुर्मी क्षत्रिय भवन चौकीपुरा बैतूल बाजार में किसानों की बैठक आयोजित की गई। इसमें सभी किसानों ने आम राय से 23 नवंबर को गन्ने के बोनस मूल्य के लिए कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया। बैठक में खासतौर से इस बात पर विचार किया गया कि बैतूल बाजार क्षेत्र मुख्य रूप से गन्ना उत्पादक क्षेत्र है, लेकिन किसानों को गन्ने के वाजिब दाम नहीं मिल पा रहे हैं। गन्ने के समर्थन मूल्य से सभी किसान प्रभावित होते हैं और कुर्मी क्षत्रिय समाज अधिकतर कृषि पर आधारित हैं। इसलिए कुर्मी क्षत्रिय समाज बैतूल के जिलाध्यक्ष एडवोकेट अशोक वर्मा ने भी किसानों की इस मांग को समाज की ओर से अपना समर्थन प्रदान किया है। किसानों के अनुसार मध्यप्रदेश में ही गन्ना उत्पादक किसानों को सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है। शुगर मिल से तो समर्थन मूल्य के दाम मिलते हैं पर सरकार को प्रोत्साहन राशि या बोनस देना चाहिए। केंद्र सरकार ने 290 रुपये समर्थन मूल्य घोषित किए हैं और यहां इतने ही मिल पाते हैं जबकि यूपी, पंजाब सहित अन्य राज्यों में वहां की राज्य सरकारें भी अपनी ओर से बोनस राशि देती है, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल 350 रुपये तक मिल जाते हैं। किसानों की मांग है कि पूरे प्रदेश के गन्ना किसानों को सरकार ने मदद देना चाहिए। इसी मांग को लेकर किसानों ने तय किया है कि जल्द एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा

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