इसे कहते हैं ईमानदारी: मालिक को तलाश करके लौटाया पर्स

छात्र शुभम झाड़े ने पेश की नैतिकता की मिसाल, पर्स मालिक ने माना आभार

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    इसमें कोई शक नहीं कि आज भी ईमानदारी जिंदा है। इसी का प्रमाण आज फिर शहर के टेलीफोन कॉलोनी निवासी और इंदौर में पढ़ाई कर रहे युवा शुभम झाड़े ने दिया। ग्रीन सिटी निवासी पत्रकार उत्तम मालवीय का पर्स आज दोपहर में ऑफिस से घर लौटते समय टेलीफोन कॉलोनी में शुभम के घर के पास गिर गया था। शुभम चाहते तो उस पर्स को रख सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा बिल्कुल नहीं किया। उन्होंने पर्स में ऐसा कोई दस्तावेज तलाशा जिससे पर्स मालिक का पता चल सके। उन्हें म्युचुअल फंड अभिकर्ता रीतेश कुमार सोनी का विजिटिंग कार्ड नजर आया। शुभम ने श्री सोनी को काल किया तो उन्होंने अपना पर्स गिरने से इंकार किया। इस पर दोबारा पर्स की तलाश ली तो उसमें पोस्ट ऑफिस की एक रसीद दिखी जिसमें नाम लिखा था। श्री सोनी को यह जानकारी देने पर वे तत्काल पहचान गए और उन्होंने श्री मालवीय को जानकारी और शुभम का नंबर दिया। इसके बाद शुभम से संपर्क करने पर उन्होंने बुलवाया और पर्स सौंप दिया। शुभम ने पर्स में रखे सभी कागजात और रुपये पूरी तरह सुरक्षित रखे और जिस तरह पर्स मिला उसी तरह वापस कर दिया। पर्स मिल जाने पर श्री मालवीय ने शुभम का आभार माना। शुभम का कहना है कि यदि नैतिकता नहीं बची तो फिर व्यक्ति में कुछ भी नहीं रह जाता है। इसलिए वे हमेशा नैतिकता बरकरार रखना चाहते हैं। श्री मालवीय ने शुभम के यह विचार जानकर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
    काल आने पर पता चला कि गिर चुका है पर्स
    इस पूरे मामले की खास बात यह है कि पर्स कब गिर गया, यह श्री मालवीय को पता ही नहीं था। श्री सोनी का जब उन्हें काल आया तो उन्होंने पर्स गिरने या गुमने से साफ मना कर दिया था। इस पर श्री सोनी ने एक बार जेब चेक करने को कहा और जब जेब चेक किया तो वाकई पर्स जेब में नहीं था। खैरियत यह रही कि पर्स गुमने पर जो मानसिक पीड़ा उठाना पड़ता, उसे भोगे बगैर ही शुभम की सदाशयता, ईमानदारी और उच्च नैतिकता के कारण पर्स हाथ में आ चुका था।

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