हॉस्टल में रंगारंग कार्यक्रम : आला अफसरों को देखने की फुर्सत नहीं, मनमर्जी से संचालन, होनी चाहिए लापरवाहों पर सीधे एफआईआर

▪️ उत्तम मालवीय, बैतूल
जिले के कुछ विभाग तो ऐसा लग रहा है कि भगवान भरोसे ही चल रहे हैं। जनजातीय कार्य विभाग (Tribal Affairs Department) भी इसी श्रेणी में रखा जा सकता है। विभाग के अफसरों को जहां मैदानी स्तर पर झांकने की फुर्सत नहीं है, वहीं मैदानी अमला पूरी मनमानी करते हुए काम कर रहा है। शाहपुर के एकलव्य छात्रावास (Eklavya Hostel Shahpur) में जन्माष्टमी की आड़ में आयोजित किया गया रंगारंग कार्यक्रम इसका ताजा उदाहरण है। यदि इस मामले की विभिन्न संगठनों द्वारा शिकायत नहीं की जाती तो विभागीय तौर पर शायद ही कोई कार्यवाही होती।
अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के बच्चों की बेहतर शिक्षा दीक्षा और उनका स्तर ऊंचा उठाने के लिए शासन द्वारा छात्रावासों का संचालन किया जाता है। इन पर हर साल करोड़ों रुपये की भारी भरकम राशि भी खर्च की जाती है। इसके बावजूद लगता नहीं कि इसका वास्तविक लाभ उन्हें मिल पा रहा है। वजह यह है कि छात्रावासों में पदस्थ अधिकांश अधीक्षकों का मूल उद्देश्य शासन की मंशा से मेल ही नहीं खाता। यही कारण है कि जिले के अधिकांश छात्रावास भगवान भरोसे चल रहे हैं। उनमें पदस्थ अधीक्षक पूरी तरह से मनमर्जी से काम करते हैं। खास बात यह है कि इन्हें रोक टोक करने वाला भी नहीं है।
शाहपुर एकलव्य छात्रावास का आयोजन पूरे जिले की व्यवस्था की पोल खोल देता है। शासन या विभाग की गाइड लाइन में जन्माष्टमी का ऐसा कोई सार्वजनिक आयोजन किए जाने का उल्लेख ही नहीं है। छात्रावास के भीतर खुद बच्चों द्वारा कोई आयोजन कर लिया जाए वह बात अलग है। इसके बावजूद एक अधीक्षक द्वारा इतना भव्य आयोजन कर लिया गया। आयोजन भी ऐसा जिसे जलसा कहा जाना ठीक होगा, जिसमें तमाम जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों तक को बुलवा लिया गया।
अब सवाल यह उठता है कि क्या छात्रावास परिसर में इस आयोजन के लिए अधीक्षक ने कोई अनुमति ली थी? यदि ली थी तो किसके द्वारा अनुमति दी गई थी? कन्या छात्रावास में शाम 5 बजे के बाद खुद पालक तक प्रवेश नहीं कर सकते। इसके बावजूद अधीक्षक ने इतना बड़ा फैसला कैसे ले लिया? यदि अनुमति दी गई हो तो अनुमति देने वाले ने अनुमति कैसे दे दी? इस आयोजन का खर्च कहां से हुआ या होगा? अधीक्षक द्वारा अपने निजी खर्च से तो आयोजन किया नहीं जाएगा, जाहिर है कि छात्रावास के संचालन के लिए आने वाली राशि से ही इसे एडजस्ट किया जाएगा। क्या यह नियमों का उल्लंघन नहीं है?
इतना बड़ा आयोजन कोई गुपचुप तरीके से रातों रात प्लानिंग करके तो किया नहीं होगा। काफी दिनों से इसकी तैयारी भी चल रही होगी। अधिकारियों को जब आमंत्रण दिया गया था तब ही सही उन्हें भी इसकी सूचना मिल गई होगी। आयोजन में कई ऐसे ब्लॉक स्तर के प्रशासनिक और विभागीय अधिकारी भी शामिल हुए जिनकी जिम्मेदारी छात्रावासों के संचालन की मॉनीटरिंग करना है। इन अधिकारियों ने भी नियम विरूद्ध हो रहे इस आयोजन को रूकवाने के कोई प्रयास नहीं किए बल्कि वे खुद बड़े ठाठ से कार्यक्रम में शरीक भी हुए।
यही नहीं कार्यक्रम होने के बाद जब सभी को पूरी तरह से जानकारी हो चुकी थी, हंगामा मच चुका था, उसके बाद भी किसी ने जिम्मेदारी का निर्वहन करना जरुरी नहीं समझा। यदि जयस और गोंगपा जैसे संगठन शिकायत को आगे नहीं आते तो इस पूरे मामले में कोई कार्यवाही तक नहीं होती। ऐसे में कार्यवाही तो ब्लॉक स्तर के उन अधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए जिन्होंने पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना रवैया दिखाया और आयोजन में शामिल भी हुए।
नियम से इन अधिकारियों को पहले तो कार्यक्रम को रूकवाना था और फिर भी यदि नहीं रूकता तो खुद आला अफसरों को सूचित करना था। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं हुआ। इस आयोजन से नियम कायदों की पूरी तरह से धज्जियां उड़ गई है। ऐसे में अधीक्षकों को केवल निलंबित किए जाने से काम नहीं चलेगा बल्कि इनके खिलाफ तो सीधे एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए। यही मांग जयस और गोंगपा जैसे संगठन भी कर रहे हैं। ऐसा होने से ही छात्रावासों की व्यवस्था में सुधार हो सकेगा।
मॉनीटरिंग पर जरा भी नहीं ध्यान
छात्रावासों की मॉनीटरिंग जिला या ब्लॉक स्तर से होती है, ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। ऐसा कोई प्रेस नोट आज तक देखने को नहीं मिला जिसमें सहायक आयुक्त या जिला स्तर अथवा ब्लॉक स्तर के किसी अधिकारी ने किसी छात्रावास का निरीक्षण किया हो और कमी पाए जाने पर कोई कार्रवाई की हो। दूसरी ओर होशंगाबाद से उपायुक्त छात्रावासों का नियमित निरीक्षण करते हैं और कई खामियां भी उन्हें मिलती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले के अधिकारी छात्रावासों के व्यवस्थित संचालन को लेकर कितने गंभीर हैं।
जबकि सूत्र बताते हैं कि कई छात्रावासों में अधीक्षक कई-कई दिनों तक ढूंकते तक नहीं है। छात्रावास चपरासी और चौकीदारों के भरोसे चलते हैं। हाल ही में जिला मुख्यालय के एक छात्रावास के स्टोर में आग लग गई थी। इससे जाहिर है कि छात्रावासों के रखरखाव तक पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। ग्रामीण अंचल के छात्रावासों के तो हाल और खराब बताए जाते हैं।



