Rakshabanadhan ki ajib parmpara: रक्षा बंधन का अजीब रिवाज, यहां बहनें देती हैं अपने भाइयों को मरने का श्राप, सुनकर नहीं होगा यकीन

strange customs of raksha bandhan : भाई-बहन का प्रेम दुनिया का सबसे पवन प्रेम होता है। बचपन में पुष्पित पल्लवित हुआ यह प्रेम और आत्मीयता आजीवन बनी रहती है। इसी पवन प्रेम और आत्मीयता को प्रकट करने का पर्व रक्षाबंधन है। जिसे पूरे देश में आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी के रूप में रेशम की डोर बांधती हैं।
इसके साथ ही अपने भाइयों को लंबी उम्र, सलामती और सुखी समृद्ध रहने का आशीर्वाद देती हैं, प्रार्थना करती हैं। भाई भी अपनी बहन को जीवन भर रक्षा करने का वचन देते हैं। रक्षाबंधन की इस परंपरा के बारे में तो आप सभी वाफिक हैं ही। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि हमारे ही देश में एक स्थान ऐसा भी है जहां रक्षाबंधन की एक अजीब परंपरा निभाई जाती है। आप शायद यकीन ना करें, यहां बहनें अपने भाई को मरने का श्राप देती हैं। भाइयों को हर साल अपनी बहनों से यह श्राप मिलता है।
देश के प्रमुख न्यूज चैनल जी न्यूज द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के एक समुदाय में रक्षाबंधन को लेकर अजीब परंपरा निभाई जाती है। यहां बहनें रक्षाबंधन के बाद मनाए जाने वाले भाईदूज पर्व के दिन अपने भाइयों को गालियां देती हैं। उन्हें बुरा बोलती हैं और मरने का श्राप तक दे डालती हैं। हालांकि इसके बाद वे प्रायश्चित के तौर पर खुद को दर्द भी देती हैं।
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वे श्राप देने के बाद अपनी जीभ में कांटा चुभाती हैं। इसके बाद रक्षाबंधन का त्योहार उसी उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है जैसे कि आप और हम मनाते हैं। बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उसे खुश रहने और लंबी जिंदगी जीने का आशीर्वाद देती हैं। दरअसल, यह श्राप देने की वजह भी भाइयों का अहित करना नहीं है। बल्कि उनके भले के लिए ही बहनें श्राप देती हैं।
इस कारण से है यह परंपरा
जी न्यूज के मुताबिक इस अजीब परंपरा के पीछे एक पौराणिक मान्यता है। वह यह कि एक बार यमराज ऐसे किसी व्यक्ति के प्राण लेने धरती पर आए थे, जिसकी बहन ने उसे कभी बुरा न कहा हो। इसकी भनक एक बहन को लग जाती है और वो अपने भाई को गालियां देने लगती है, श्राप देने लगती है।
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यह देखकर यमराज वापस चले जाते हैं। तब से ही यहां बहनें पहले भाई को श्राप देने की परंपरा निभाती हैं और फिर उसका प्रायश्चित करके भाई को ढेरों आशीर्वाद देती हैं। सुनने में भले ही परंपरा अजीब लगे, लेकिन जशपुर में यह परंपरा आज भी शिद्दत से निभाई जाती है।



