Clean India Mission : कागजों में हो गईं पंचायतें ओडीएफ, इधर शौचालयों में रखे हैं भूसा और कंडे, आज भी पड़े हैं आधे अधूरे

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने की पहल हुई थी। सरकार की मंशा थी कि घर-घर शौचालय निर्माण कर गाँव को ओडीएफ बनाया जाए, लेकिन अफसोस कि इस महत्वपूर्ण कार्य को कागजों में ही पूरा किया गया है। ऐसे कई मामले घोड़ाडोंगरी ब्लॉक की पंचायतों में सामने आए हैं।
इनमें नाम के लिए शौचालय तो बने हैं लेकिन कहीं वे अधूरे हैं, तो कहीं-कहीं आज तक उनमें दरवाजे नहीं लग पाए हैं। किसी के शौचालय पर छत या पाइप नहीं डली है। कहीं-कहीं तो शौचालय में कंडे, लकड़ी, खराटे, भूसा भरा है। इन शौचालयों को बनाने गाँव में बजट तो लाखों रूपये खर्च हुआ, पर सिर्फ नाम के लिए। हर घर में शौचालय की यहीं स्थिति है।
इस संबंध में घोड़ाडोंगरी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के ब्लॉक अध्यक्ष नरेंद्र कुमार महतो का कहना है कि इस तरह शौचालय बनवाने से क्या फायदा, जब गरीब जनता लोटा लेकर शौच के लिए इधर-उधर भटकती रहती है।
कागज पर बना इज्जतघर और खुले में शौच
घोड़ाडोंगरी ब्लॉक की अनेक पंचायतों जिनमें जांगड़ा, भोपाली, केरिया, रतनपुर, शोभापुर शामिल हैं, में जिन-जिन लोगों के घर शौचालय स्वीकृत हुए है, वह अभी भी अधूरे हैं या खस्ताहाल हो चुके हैं। अब तो ग्रामीण भी कहने लगे हैं कि शौचालय कब तक पूर्ण होंगे, इसका किसी को पता नहीं है, क्योंकि लोगों को केवल शौचालय बनवाने का आश्वासन मात्र दिया जाता है। यहाँ की महिलाएं सरकार को कोसती हैं कि कैसे उनके घरों में नाम के लिए बना शौचालय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया और जबसे शौचालय बना तबसे वह इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं।
ग्रामीण विकास ठाकुर, अशोक मुखड़े, तेजी मर्सकोले, दशरथ मर्सकोले, उर्मिला मर्सकोले ने बताया कि शौचालय निर्माण में भी खूब भ्रष्टाचार किया गया। गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा। शौचालय निर्माण के बाद से ही दीवार क्रेक होने लगी थी।
इतना ही नहीं रतनपुर पंचायत की उर्मिला मर्सकोले बताती है कि 2014-15 में शौचालय के लिए काम तो चालू किया गया था परंतु वह आज तक पूर्ण नहीं हुआ है। सरपंच से बात करो तो हो जाएगा का आश्वासन भर हमेशा मिलता है परंतु 8 से 10 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी हमारे घर के शौचालय कंप्लीट नहीं हुए। हमें मजबूरी में खुले में शौच जाना पड़ रहा है।
नहीं लगे वाश बेसिन
आदेशानुसार शौचालय के साथ ही वाश बेसिन भी लगाना था। लेकिन मेहकार, लोहारढाना, खोकरा, अनकावाड़ी, रतनपुर, शोभापुर में कहीं वाश बेसिन लगाया गया है, तो कहीं उसका नामोनिशान नहीं है। ग्रामीण आशीष बारसे, रमेश धुर्वे ने बताया कि बरसात के मौसम में इतनी समस्या झेलनी पड़ती है कि हर खेत में पानी भरा रहता है। बैठने के लिए जगह नहीं होती है। जिन्हें शौचालय मिला भी है, उनका अभी तक अधूरा पड़ा है। न दरवाजा लगा और न ही सीट बैठाई गई है। बस ईट की दीवाल उठा दी गई है जो यूज करने के हाल में नहीं है। सरकार के कागज में तो पूरा है पर गांव में कुछ व्यवस्था नहीं है।
सुबह-शाम तेज दुर्गंध का सामना
खुले में शौच की वजह से लोगों को तेज दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। लोग अक्सर सड़क किनारे ही शौच के लिए जाते हैं। इसी वजह से दुर्गंध भरा वातावरण बना रहता है। सड़क से गुजरने वाले लोगों को इस समस्या का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण जितेन, आदि, रवि का आरोप है कि अगर किसी के घर में एक मरीज है तो दूसरे व्यक्ति की हालत उसे खेतों में शौचालय लाने ले जाने में खराब हो जाती है। किसी का पेट खराब हो गया तो ढूंढे जगह नहीं मिलती है। यह समस्या महिलाओं के लिए सबसे बड़ी है। खुले में शौच की वजह से तरह-तरह की बीमारियां होने का खतरा अलग रहता है।
आपके द्वारा मुझे जानकारी मिली है। मैं शीघ्र ही उन पंचायतों का दौरा करके शौचालय का काम कंप्लीट करवाता हूं और संबंधित पंचायतों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। आप और हम मिलकर ग्रामीणों को प्रेरित करेंगे कि खुले में शौच ना जाए।
प्रवीण कुमार इवने
सीईओ, जनपद पंचायत, घोड़ाडोंगरी
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स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 2011 और 12 में शौचालय का निर्माण कार्य हुआ था। उसके बाद 2014-15 में इक्का-दुक्का ही शौचालय के निर्माण कार्य हुए हैं। फाइल देखकर ही पूरी जानकारी बताई जा सकती है।
विजय लाल धुर्वे
सरपंच



