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बदहाल गांव: इलाज मुहैया कराने चाची को पीठ पर लादकर ले गया दो किलोमीटर

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    वीडियो में आप जिस शख्स को तेजी से चलते हुए देख रहे हैं वो कोई जुर्म करके नहीं भाग रहा है, ना ही किसी से पीछा छुड़ाने तेज चल रहा है और हां, वह अकेला भी बिल्कुल नहीं है। दरअसल, वह युवक अपनी पीठ पर एक महिला को ले जा रहा है, जो उसकी चाची है। महिला गम्भीर है और वहां तक खस्ताहाल सड़क (bad road) के कारण एम्बुलेंस या अन्य वाहन आ पाना सम्भव नहीं है। इसलिए उसकी जान बचाने अपनी पीठ पर लादकर ले जा रहा है। युवक 2 किलोमीटर तक उसे इसी तरह ले गया और फिर कहीं महिला को इलाज मिल पाया और उसकी जान बच पाई।

    चहुँमुखी विकास के दावों के बीच यह सच्ची तस्वीर है बैतूल जिले के आमला ब्लॉक की ग्राम पंचायत कलमेश्वरा की। जिले के सुदूर ग्रामीण अंचलों के ग्रामीण किस दशा में अपना जीवन जी रहे हैं, इसका अंदाजा इस उदाहरण को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। सड़क नहीं होने से यहां बीमार ग्रामीण गांव में ही बिना उपचार के ही दम तोड़ देते हैं।

    बारिश में उफनते नदी-नाले ग्रामीणों की राह रोक देते हैं तो सामान्य दिनों में भी आवागमन आसान नहीं है है। ऐसे में ग्रामीण लंबे समय से सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी तकलीफें कुछ कम हो सकें।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कलमेश्वरा में मनरेगा के अन्तर्गत निर्माण कार्य प्रारंभ है। आज कार्य करते समय एक महिला मजदूर अचानक बेहोश हो गई। महिला की हालत देखकर साथी मजदूर घबरा गए। उसे अस्पताल तक पहुंचाने एम्बुलेंस का या किसी अन्य वाहन का वहां तक आना संभव नहीं था।

    आनन फानन में महिला के भतीजे ने महिला को पीठ पर लादा और सरपट भागा। लगभग 2 किलोमीटर का सफर उसने इसी हालत में तय किया और उसके बाद महिला को चिकित्सा सुविधा नसीब हो सकी। जिसके बाद महिला मजदूर की जान बच पाई।

    महिला की जान तो बच गई पर ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश बना हुआ है। कारण यह है कि लाख प्रयास करने के बाद भी ग्राम पाचनजोत तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। आए दिन ग्रामीणों को मुसीबतों का सामना करना ही पड़ता है।

    दो महिलाओं की जा चुकी है जान

    ग्राम की महिला शिवरती सिलूकर, धुनिया भोपकर, गोरेलाल सिलूकर आदि ने बताया कि गुरूवार मनरेगा पर कार्य के दौरान महिला मजदूर श्यामवती सिलूकर अचानक बेहोश हो गई। तबीयत बिगड़ने पर श्यामवती के भतीजे लिखीराम ने पीठ पर लादकर दो किलोमीटर पैदल चलकर डॉक्टर के पास पहुंचाया। समय पर उपचार मिला तो बहन की जान बच गई।

    महिला शिवरती सिलूकर सहित दो दर्जन से अधिक महिलाओं ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि इस बार तो हादसा टल गया, लेकिन पहले हमारे ग्राम की दो महिलाओं की जान जा चुकी है। महिलाओं ने बताया कि ग्राम तक सड़क नहीं है। रास्ते में नदी-नाले पड़ते हैं। कुछ वर्ष पहले बारिश के दिनों में समय पर उपचार न मिलने के कारण दो महिलाओं की जान जा चुकी है।

    कपड़े की झोली डालकर ले जाते हैं ग्रामीण

    महिलाओं ने बताया कि बारिश के दिनों में यदि किसी महिला को प्रसव पीड़ा होती है तो उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मरीज को अस्पताल तक पंहुचाने के लिए हम कपड़े की झोली बनाते हैं और उसमें मरीज को रखकर अस्पताल तक पहुंचाते हैं। कई बार तो मरीज की जान बच जाती है, लेकिन कभी-कभी हमारा प्रयास असफल रहता है।

    मंजूरी के बाद भी नहीं बन रही सड़क

    ग्रामीण कालूराम सिलूकर, रतन सिलूकर, मुन्ना दरसीमा ने बताया कि एक वर्ष पहले 14 लाख की लागत से मनरेगा योजना के अन्तर्गत सड़क निर्माण को मंजूरी मिली। ग्रामीणों के लंबे संघर्ष के चलते सड़क निर्माण को मंजूरी तो मिल गई पर निर्माण बीच में ही छोड़ दिया गया। जिसके कारण समस्या जस की तस है।

    भूमि दान देने के लिए भी सामने आए किसान

    ग्राम के कालूराम सिलूकर ने बताया कि सड़क मार्ग में अधिकांश भूमि शासकीय है तथा कुछ किसानों की जमीन भी मार्ग में आ रही है। किसान दान देने के लिए तैयार बैठे हैं पर शासकीय प्रक्रिया इतनी जटील है कि समस्या सुलझ ही नहीं पा रही है।

    नामांतरण में अटका मामला

    ग्रामीण रतन सिलूकर ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए एक किसान की भूमि की आवश्यकता भी है। किसान भूमि दान देने के लिए तैयार बैठा है पर उसके लिए उसे नामांतरण कराना है। लंबे समय से हम चक्कर लगा रहे हैं पर नामांतरण न होने के कारण काम अधर में ही अटक गया है।

    बोले ग्रामीण- करेंगे हम आंदोलन

    आदिवासी बाहुल्य ग्राम पाचनजोत (बोदुड़ रैयत) के ग्रामीणों ने अपने ग्राम में ही एकत्रित होकर नारेबाजी की और शासन-प्रशासन को चेतावनी दी कि जल्द ही यदि समस्या का समाधान नही किया गया तो हम आंदोलन करेंगे।

    सड़क निर्माण के लिए काफी प्रयास किए और सुदूर सड़क मंजूर करवाई गई। आधी सड़क बन भी चुकी है। नामांतरण के लिए अधिकारियों से चर्चा की गई है जल्द ही मामला सुलझा लिया जाएगा और सड़क निर्माण करवाया जाएगा।
    डॉ. योगेश पण्डाग्रे, विधायक, आमला

    मैं अभी पेशी के लिए जबलपुर आया हूं। ग्रामीणों का कार्य लगभग पूरा कर दिया गया है। जल्द आदेश जारी हो जाएंगे।
    रोहित विश्वकर्मा, नायब तहसीलदार, आमला

    दरअसल आवेदन लोक सेवा केन्द्र के माध्यम से जमा होना है। लोकसेवा केन्द्र में तकनीकी समस्या के कारण आवेदन जमा नहीं हो पा रहा था। मेरे द्वारा ऑफ लाईन फाईल जमा करवा दी गई है। जल्द कार्य हो जाएगा।
    बैद्यनाथ वासनिक, तहसीलदार, आमला

  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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