Mahavir Jayanti 2022 : भगवान महावीर ने दिया था दुनिया को पंचशील का सिद्धांत, छोड़ दिया था राजपाट

महावीर जयंती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है. जैन धर्म के पूज्यनीय भगवान महावीर का जन्मदिन आज 14 अप्रैल दिन गुरुवार को मनाया जा रहा है. जैन धर्म के लोग महावीर जयंती को हर्षोल्लास से मनाते हैं.
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व बिहार के कुंडलपुर के राज घराने में हुआ था. इनके माता का नाम त्रिशला और पिता सिद्धार्थ थे. भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था. उनका 30 वर्ष की आयु में आध्यात्म की ओर झुकाव हुआ, वे राजपाट छोड़कर तप करने लगे और स्वयं की इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर बनें.
कैसे मनाते हैं महावीर जयंती
इस दिन भगवान महावीर की पूजा-अर्चना की जाती है और उनके दिए गए उपदेशों को स्मरण करके उनके बताए गए सिद्धांतों पर चलने का प्रयास किया जाता है. इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. जैन समुदाय के लोग हर्षोल्लास से भगवान महावीर की जयंती मनाते हैं.
भगवान महावीर के पंचशील सिद्धांत
भगवान महावीर ने जैन धर्म के प्रचार एवं प्रसार के लिए काम किए हैं. उन्होंने दुनिया को पंचशील सिद्धांत दिया. पंचशील सिद्धांत के पांच प्रमुख बातें सत्य, अहिंसा, अचौर्य (अस्तेय) यानी चोरी नहीं करना, अपरिग्रह यानी विषय एवं वस्तुओं के प्रति आसक्त न हों और ब्रह्मचर्य है. उनके जीवन के इन पांच महत्वपूर्ण सिद्धांतों को अपना करके व्यक्ति मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान महावीर का जन्म होने वाला था, उससे पहले उनकी माता त्रिशला को 16 प्रकार के सपने आए थे. उन सपनों को जोड़कर महाराज सिद्धार्थ ने उसमें छिपे संदेश को समझा था. जिसके अनुसार उनका होने वाला पुत्र ज्ञान प्राप्त करने वाला, सत्य और धर्म का प्रचारक, जगत् गुरु आदि जैसे महान गुणों वाला होगा.
भगवान महावीर के प्रेरणादायी विचार
ईश्वर का कोई अलग अस्तित्व नहीं है। बस सही दिशा में अपना पूरा प्रयास करके देवताओं को पा सकते हैं। हर आत्मा अपने आप में आनंदमय और सर्वज्ञ है। आनंद हमारे अंदर ही है इसे बाहर ढूंढने की कोशिश न करे। हर एक जीवित प्राणी के ऊपर दया करो। घृणा से केवल विनाश होता है। खुद पर विजय प्राप्त करो। क्योंकि यह एक चीज लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है। सत्य के प्रकाश से प्रबुद्ध हो, बुद्धिमान व्यक्ति मृत्यु से ऊपर उठ जाता है।



