नर्सेस डे पर जिला अस्पताल में नर्सों का सम्मान; सीएस बोले- आलोचना और अभद्रता सहकर भी करती हैं सेवा

जिला अस्पताल बैतूल मेंं पदस्थ नर्सेस के साथ आज बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति ने अपने जीवन रक्षक प्रकल्प ऑटो एम्बुलेंस योजना के साथ अंतराष्ट्रीय नर्सेस दिवस मनाया। इस अवसर पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अशोक बारंगा, आरएमओ डॉ. रानू वर्मा, सबसे सीनियर नर्स अनुराधा रघु सहित करीब एक सैकड़ा नर्सेस मौजूद थीं।
प्रतिदिन मरीजों की सेवाओं में जुटी नर्सेस अपना जीवन जीना तो जैसे भूल ही जाती है। इसी वजह से आज नर्स दिवस पर उनके कार्यों और समर्पण के प्रति सम्मान के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान कोरोना काल में नर्सेस द्वारा दी गई सेवाओं को भी सराहा गया। इस अवसर पर केक कटिंग कर नर्सेस डे मनाया गया एवं सम्मान पत्र देकर जिला अस्पताल में पदस्थ सभी नर्सों का सम्मान संस्था के माध्यम से किया गया। इस अवसर पर समिति सचिव भारत पदम, सह सचिव ईश्वर सोनी, उपाध्यक्ष नीलम वागद्रे, वरिष्ठ सदस्य हर्षित पंडाग्रे, संगीता अवस्थी सहित करीब एक सैकड़ा नर्स मौजूद थी। कार्यक्रम का संचालन समिति अध्यक्ष गौरी पदम ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. अशोक बारंगा ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में हर दिन डॉक्टर हो या नर्स उन्हें आलोचनाओं से दो चार होना ही पड़ता है। यदि नर्स 99 अच्छे कार्य करें और एक काम बिगड़ जाए तो उसके 99 अच्छे कार्यों को भुला दिया जाता है। यह अकेले नर्स के साथ ही नहीं डॉक्टर एवं अन्य फील्ड के लोगों के साथ भी होता है। उन्होंने कहा कि नर्स को उनके कार्यों के बारे में बताना सूरज को दिया दिखाने जैसा है। दुनिया का कोई भी अस्पताल बिना नर्स के नहीं चल सकता।
इस अवसर पर डॉ. रानू वर्मा ने कहा कि नर्स सेवा का पर्याय है। जिला अस्पताल लंबे समय से मानव संसाधन की कमी से जूझ रहा है, लेकिन फिर भी नर्सेस ने कभी काम को लेकर कोताही नहीं की। मुश्किल वक्त में अधिक समय भी काम करना पड़ा तो उन्होंने समर्पित भाव से मरीजों की सेवा की है।
कई बार हो जाते हैं मायूस
जिला अस्पताल की मेट्रन अनुराधा रघु ने बताया कि कई बार ऐसे भी मौके आते हैं जब मरीजों की सेवा करने के बाद भी अपमान मिलता है। परिजन अभद्रता करते हैं, फिर भी नर्स सब सहकर सेवा करती है। ऐसी परिस्थिति में मायूस भी हो जाते हैं, लेकिन फिर से अपने कर्तव्य में जुट जाते हैं।
बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति की वरिष्ठ सदस्य संगीता अवस्थी ने कहा कि महिलाओं में सहनशीलता अधिक होती है। इसलिए परिचारिका की भूमिका में खरी उतरती हैं। महिलाएं सृजनकर्ता हैं, सृजन में पीड़ा होती है। उसे महिला सहन कर सकती है तो फिर समाज की दूसरी पीड़ा उसके लिए बहुत छोटी होती है। नर्सेस हर तरह की बातें सहन करती हैं। अस्पताल में आने वाला मरीज और परिजन परेशान होते हैं, मानसिक, आर्थिक शारीरिक रुप से परेशान होता है। ऐसे में कई बार नर्सेस के साथ भी अभद्रता कर देते हैं, लेकिन हर बात को नर्स सहने के बाद भी सेवा करती है।
ऑटो एम्बुलेन्स योजना की संचालक गौरी पदम ने कहा हर व्यक्ति को अपने लिए भी थोड़ा सा वक्त निकालना चाहिए। हम सब मशीनों की तरह हो गए हैं। मन में यदि कुछ करने की इच्छा है तो थोड़ा वक्त अपने लिए निकालकर अपने मन की इच्छाओं को मारने की बजाय उसे पूरा करने की कोशिश करें। उपाध्यक्ष नीलम वागद्रे ने कोराना काल में की गई सेवाओं के लिए नर्सेस की सराहना की।



