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छलावा साबित हो रही अनुग्रह सहायता योजना, तीन साल बाद भी नहीं मिली मदद

  • उत्तम मालवीय, बैतूल © 9425003881
    मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संबल (sambal) योजना के अंतर्गत अनुग्रह सहायता योजना (anugrah sahayta yojana) शुरू की गई है। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर गरीब परिवारों को सामान्य एवं दुर्घटना मृत्यु पर 2 एवं 4 लाख रुपये की सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान है। यह योजना गरीब परिवारों के लिए छलावा ही साबित हो रही है। पीड़ित परिवारों को 3-3 साल बाद भी अनुग्रह राशि नहीं मिल पाई है। परिवार के सदस्य दफ्तरों और बैंक के चक्कर काट-काट कर ही परेशान होने को मजबूर हैं।

    योजना के तहत अकेले बैतूल शहर के 43 आवेदन लंबित पड़े हैं। इन आवेदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन भुगतान आज तक नहीं हो सका है। इनमें 7 आवेदन तो वर्ष 2019 के हैं। इन प्रकरणों में मार्च, अप्रैल, मई महीने में मृत्यु हुई थी और जून माह में आवेदन स्वीकृत भी हो चुका था। इसके बावजूद आज तक सहायता राशि नहीं मिल पाई है। वहीं सबसे ज्यादा 24 प्रकरण वर्ष 2021 के हैं। यदि जिले के लंबित प्रकरण देखें तो उनकी संख्या सैकड़ों में हैं।

    राहत की जगह मिल रही प्रताड़ना
    शासन के इस रवैये से गरीब परिवारों के लिए यह योजना राहत देने के बजाय प्रताड़ना देने वाली ही साबित हो रही है। किसी परिवार ने अपना मुखिया खोया है तो किसी ने महत्वपूर्ण सदस्य। ऐसे में दुःख की इस घड़ी में भी उन्हें अनुग्रह सहायता की राहत मिलने की जगह बार-बार कार्यालय और बैंक के चक्कर काटने और फिर भी राशि नहीं मिलने की प्रताड़ना झेलना पड़ रहा है। इससे इन परिवारों का दुःख कम होने की जगह उसमें इजाफा ही हो रहा है।

    92 लाख रुपये का होना है भुगतान
    इन 43 प्रकरणों में 92 लाख रुपये की अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाना है। योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर 2 लाख और दुर्घटना में या आकस्मिक मृत्यु पर 4 लाख रुपये की राशि का प्रावधान है। इन प्रकरणों में 40 प्रकरण सामान्य मृत्यु के हैं जबकि 3 प्रकरण आकस्मिक मृत्यु के। इनमें से किसी को अभी तक राशि का भुगतान नहीं हो पाया है।

    राज्य स्तर से होता है राशि का भुगतान
    योजना के तहत राशि का भुगतान सीधे हितग्राहियों के खाते में किया जाता है। नगरीय निकायों और जनपदों से तो आवेदन आने पर उनकी जांच पड़ताल कर उन्हें स्वीकृत कर राज्य स्तर पर भेज दिया जाता है पर वहां यह प्रकरण महीनों नहीं बल्कि सालों तक धूल खाते पड़े रहते हैं। दूसरी ओर हितग्राही राशि मिलने की आस में कभी दफ्तर के चक्कर काटते हैं तो कभी बैंक के।

    सरकार कर रही गरीबों से मजाक: भाटिया
    बैतूल नगर पालिका के पूर्व पार्षद और कांग्रेस के झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश पदाधिकारी रमेश भाटिया कहते हैं कि इस योजना के जरिये प्रदेश सरकार गरीबों के साथ मजाक कर रही है। अनुग्रह राशि बिना विलंब के मिलना चाहिए। इससे परिवार को राहत मिलेगी। इस तरह सालों तक मामले लंबित रखने से शोक संतप्त परिवारों का दुःख और बढ़ ही रहा है। सरकार के पास फालतू कार्यों के लिए भरपूर पैसा है। जबकि गरीब परिवारों को अनुग्रह राशि के लिए भी सालों तक लटका कर बार-बार चक्कर काटने को मजबूर किया जा रहा है। रोजाना उनके पास कई लोग राशि के बारे में जानकारी लेने आते हैं।

    इन हितग्राहियों को राशि का इंतजार
    अपने परिवार के सदस्यों की मृत्यु होने पर जिन हितग्राहियों को अनुग्रह राशि का इंतजार है उनमें ज्योति पवार, सावित्री राजोनिया, सरिता पवार, अनिता लुधियानी, शिवकली, रुक्मिणी सोनी, सरिता शर्मा, आशा, तबस्सुम खान, संध्या पवार, दारा सिंह धुर्वे, इंदिरा पाटिल, यशोदा, रेणु कापसे, शकीला बानो, उषा, पवन कमरे, प्रकाश मालवी, सुनीता अमझरे, शिवकिशोर भोले, गंगा कहार, बेबी सोनारे, नेहा धुर्वे, सुमन सरसोदे, दीपक, पीरमवती उइके, लकी, रोशनी खातरकर, अफसाना शेख, दिवाकर राव, ओमप्रकाश सोनी, सुनील, नीलम राजपूत, यशोदा मकोड़े, उमा बाई, मालती पाल, सरोज पवार, करिश्मा पवार, कृष्णा कुमार, दमयंती और रुक्मणि खाड़े शामिल हैं।

  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

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