बड़ी खबरेंदेश/विदेशबैतूल अपडेटब्रेकिंग न्यूजमध्यप्रदेश अपडेटमहिला जगत/बाल जगत

गांव की महिलाओं ने बनाया ऐसा वाशिंग पाउडर जो ग्रामीण इलाकों में मचा रहा धूम

  • मनीष राठौर, भैंसदेही
    वाशिंग पाउडर के बड़े-बड़े ब्रांड्स के बीच भैंसदेही के एक छोटे से गाँव की 121 महिलाओं ने कड़ी मेहनत से अपना ऐसा वाशिंग पाउडर बनाया है जो ग्रामीण इलाकों में धूम मचा रहा है। इस आजीविका निर्मल वाशिंग पाउडर ब्रांड की ना केवल कीमत कम है बल्कि क्वालिटी भी बढ़िया है। यह आजीविका वाशिंग पाउडर गाँव की 121 महिलाओं के लिए आजीविका का माध्यम बन गया है। जो महिलाएं मजदूरी के लिए पलायन करती थीं वो अब अपने गांव में रहकर आजीविका वाशिंग पाउडर का उत्पादन, पैकेजिंग और बिक्री कर मुनाफा कमा रही हैं।

    वाशिंग पाउडर का ये ब्रांड नेम आपने शायद नहीं सुना होगा। लेकिन बैतूल के छोटे से गाँव चिचोलाढाना की 121 महिलाओं की मेहनत इस ब्रांड को लगातार चर्चित बना रही हैं। मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत इस गाँव की महिलाओं का एक समूह बनाया गया।

    इन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के लिए वाशिंग पाउडर उत्पादन शुरू किया गया। जिसका नाम है आजीविका निर्मल वाशिंग पाउडर। इस समूह में 121 महिलाएं शामिल हैं। जो रोजाना 8 से 10 घण्टे तक मेहनत करके आजीविका वाशिंग पाउडर का उत्पादन, पैकेजिंग और बिक्री करती हैं।

    भैंसदेही विकासखण्ड के इस ग्राम में पहले महिलाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे गांवों और शहरों में जाना पड़ता था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। ये अब नौकर नहीं मालिक बन गई हैं। गाँव से महिलाओं का पलायन रुक गया है और समूह की महिलाओं को आमदनी होने से उनका जीवन स्तर भी सुधर रहा है।

    इस वाशिंग पाउडर को बनाने के लिए अलग-अलग शहरों से कच्चा माल मंगवाया जाता है। समूह की सभी महिलाओं को काम मिले, इसलिए सप्ताह में काम के घण्टे सभी को बराबर दिए गए हैं। 48 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम पर बिकने वाले आजीविका वाशिंग पाउडर की ग्रामीण इलाकों में काफी मांग है। क्योंकि गरीब मजदूर वर्ग के लोग महंगे वाशिंग पाउडर खरीद नहीं पाते हैं। इसलिए आजीविका वाशिंग पाउडर उनके लिए बेहद किफायती है।

    मध्यप्रदेश सरकार (MP Government) और मुख्यमंत्री (CM) शिवराज सिंह चौहान बहन-बेटियों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। आजीविका वाशिंग पाउडर इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। जहां महिलाओं को सशक्त और स्वावलंबी बनाने के लिए उन्हें नौकर नहीं बल्कि मालिक बनाने की पहल हो रही है। इस प्रयास से ये भी साबित हो रहा है कि महिलाएं हर मोर्चे पर सशक्त और काबिल हैं। बस जरूरत है तो उन्हें काम और योजनाओं का लाभ देने की, जो चिचोलाढाना में देख सकते हैं।

  • उत्तम मालवीय

    मैं इस न्यूज वेबसाइट का ऑनर और एडिटर हूं। वर्ष 2001 से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। सागर यूनिवर्सिटी से एमजेसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री प्राप्त की है। नवभारत भोपाल से अपने करियर की शुरुआत करने के बाद दैनिक जागरण भोपाल, राज एक्सप्रेस भोपाल, नईदुनिया और जागरण समूह के समाचार पत्र 'नवदुनिया' भोपाल में वर्षों तक सेवाएं दी। अब इस न्यूज वेबसाइट "Betul Update" का संचालन कर रहा हूं। मुझे उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए प्रतिष्ठित सरोजिनी नायडू पुरस्कार प्राप्त करने का सौभाग्य भी नवदुनिया समाचार पत्र में कार्यरत रहते हुए प्राप्त हो चुका है।

    Related Articles

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    Back to top button