Hathi Mahotsav MP 2025: मध्यप्रदेश में इन दिनों मेहमानों की तरह हाथियों की खातिरदारी चल रही है। राज्य के विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व में हाथी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव केवल एक परंपरागत आयोजन नहीं, बल्कि हाथियों की देखभाल, उनके स्वास्थ्य और संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
वन्य जीव प्रबंधन में अहम भूमिका
मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों में हाथी केवल आकर्षण का केंद्र ही नहीं हैं, बल्कि उनकी भूमिका वन्यजीव प्रबंधन में बेहद अहम मानी जाती है। हाथी गश्त, ट्रैकिंग और रेस्क्यू जैसे कामों में पार्क प्रबंधन के लिए सबसे भरोसेमंद साथी होते हैं। यही कारण है कि हर साल यह महोत्सव मनाकर लोगों को हाथियों के महत्व और उनके संरक्षण की जरूरत के बारे में जागरूक किया जाता है।

बांधवगढ़ में हाथियों के पुनर्जीवन को समर्पित
शहडोल जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इस बार 25 सितंबर से 30 सितंबर तक रामा हाथी कैंप, ताला में हाथी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर हाथियों को विशेष विश्राम और पसंदीदा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। पार्क प्रशासन ने इस बार महोत्सव को हाथियों के पुनर्जीवन को समर्पित किया है।
सबसे बुजुर्ग हाथी की उम्र 79 साल
कैंप में मौजूद 15 हाथियों में 9 नर और 6 मादा शामिल हैं। इनमें सबसे बुजुर्ग हाथी गौतम की उम्र 79 वर्ष है, जो अब सेवा से निवृत्त हो चुका है। वहीं सबसे छोटा हाथी गंगा है, जिसकी उम्र केवल एक वर्ष है। यह विविध आयु वर्ग दर्शाता है कि कैंप में हाथियों की देखभाल पीढ़ी दर पीढ़ी जारी है।

पहले स्नान और फिर तेल मालिश
महोत्सव के पहले दिन हाथियों को चरणगंगा नदी में स्नान कराया गया। पानी में मस्ती करते हुए इनका नजारा देखने लायक था। स्नान के बाद उन्हें कैंप में लाकर नीम और अरंडी के तेल से मालिश की गई। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने डीवार्मिंग, दांत और पैरों की देखभाल सहित नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी किया। इसके बाद हाथियों को चंदन से सजाया गया और उन्हें पसंदीदा भोजन जैसे गन्ना, नारियल, गुड़, केला, सेव, नाशपाती और मक्का परोसा गया।
खुलेआम घूमने की मिलती आजादी
भोजन के बाद उन्हें दोपहर से शाम तक जंगल में खुलेआम घूमने की आजादी दी जाती है, जहां वे कीचड़ स्नान, तालाब में खेलकूद और जंगल भ्रमण का आनंद लेते हैं। महोत्सव के दौरान आम नागरिकों को भी सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक हाथियों के दर्शन, पूजा और भोजन अर्पित करने का अवसर दिया जाता है।
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महावतों का भी किया जाता सम्मान
हाथी महोत्सव केवल हाथियों के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी देखभाल करने वाले महावतों और सहायकों के सम्मान का भी अवसर है। इस दौरान उनके स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो सकें।
संजय टाइगर रिजर्व में पूजा से शुरूआत
सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व में भी खैरीझील हाथी कैंप में हाथी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ स्थानीय विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने हाथियों की पूजा कर और उन्हें फल अर्पित कर किया। साथ ही महावतों और चारा कटरों को टॉर्च, मच्छरदानी और बैग भेंट किए गए।
हाथियों को रखा काम से मुक्त
कैंप में हाथी बापू, भरत, चित्रा और शांभवी इस आयोजन का हिस्सा हैं। उन्हें केला, पपीता, गन्ना, नारियल और सेव जैसे विशेष फल परोसे जा रहे हैं। वहीं जबलपुर से आए विशेषज्ञ चिकित्सक उनके नाखून काटने, टस्क ट्रिमिंग और पैरों की नीम तेल से मालिश जैसी सेवाएं दे रहे हैं। इस दौरान हाथियों को पूरी तरह काम से मुक्त रखा गया है ताकि वे आराम और देखभाल का पूरा लाभ उठा सकें।
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आम लोगों को भी जोड़ा आयोजन से
हाथी महोत्सव का एक और महत्वपूर्ण पहलू है स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी। इस आयोजन में ग्रामीणों और आम नागरिकों को भी जोड़ा जाता है ताकि उनमें हाथियों के प्रति जागरूकता और संरक्षण की भावना विकसित हो। परिचर्चाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को यह समझाया जाता है कि हाथी केवल वन्यजीव नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन का अहम हिस्सा हैं।
महोत्सव के जरिए दे रहे यह संदेश
हाथी महोत्सव का मकसद केवल पारंपरिक रीति-रिवाज निभाना नहीं, बल्कि लोगों को यह संदेश देना है कि हाथियों का संरक्षण भविष्य के लिए अनिवार्य है। लगातार घटती वन्यजीव आबादी और बदलते पर्यावरण में हाथियों की भूमिका और भी अहम हो गई है। ऐसे में यह आयोजन उनके स्वास्थ्य, देखभाल और समाज में उनके महत्व को रेखांकित करता है।
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